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रविन्द्रनाथ टैगोर

रविन्द्रनाथ टैगौर

इन्हे विश्व कवि के नाम से जाना जाता है।
ये मानवतावादी
प्रकृतिवादी प्रकृति के प्रेमी
आदर्शवादि आत्मा परमात्मा में विश्वास .
प्रयोजनवादी जीवन के व्यवहारिक पक्ष पर बल
यथार्थवादी भैतिक जगत में विश्वास
थे। 1913 में गीतांजली के लिए नोबेल पुरूस्कार मिला
इनके दर्शन को विश्व बोध दर्शन कहते हैं।
ज्ञान मीमांसा
ये भौतिक व आध्यात्मिक दोनो सत्य को मानते हैं। भौतिक वस्तुओं व क्रियाओं का ज्ञान भौतिक मानते थे। अर्थात इनद्रियों दवारा आध्यात्मिक तत्वों का ज्ञान योग दवारा।
योग मार्ग में सबसे सरल व महत्वपूर्ण मार्ग प्रेम मार्ग है।
ये उपनिषदीय दर्शन के पोषक थे।
तत्व मीमांसा
सृष्टि ईश्वर के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है। ईश्वर को साकार और निराकार दोनों रूपों में माना।
आत्मा के तीन कार्य हैं।
आत्म रक्षा में प्रवृत्त करना ।
ज्ञान विज्ञान की खोज व अनन्त ज्ञान की प्राप्ति में प्रवृत्त करना ।
अनन्त रूप को समझनें में प्रवृत्त करना।
वह ब्रहम को मानव रुप में परम पुरूष मानते हैं।

मूल्य मीमांस
प्रेम से ही मानव मानव की सेवा करता है।
मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।

शिक्षा के उददेश्य
शारीरिक सामाजिक नैतिक सांसकृतिक बौद्धिक व्यावसायिक आध्यात्मिक विकास पर बल।
राष्ट्ीय व अन्तर्राष्टीय भावना का विकास

पाठयक्रम
आध्यात्मिक सामाजिक व प्राकृतिक तीनों का समावेश
राष्टीय व अन्तर्राष्टीय महत्व का भाषा व संस्कृति पर बल।
परठय सहगामी क्रियाओं पर बल।
कला मातृभाषा संस्कृत विज्ञान संगीत भूगोल प्रकृति अंग्रेजी ललितकला
समाज सेवा खेलकूद नृत्य नाटक संगीत ग्रामोत्थान पर बल।

शिक्षण विधि
पुस्तकीय ज्ञान का विरोध किया।
स्वयं के अनुभवों दवारा सीखा जाये।

शिक्षण सिद्धान्त
शिक्षा में मातृभाषा का प्रयोग
कठोर नियन्त्रण की आलोचना
प्रेमपूर्ण व्यवहार
शिक्षण विधि 
रूचिकर
बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करें।
बच्चों को सक्रिय रखो।
क्रिया विधि
प्रयोग विधि
मौखिक विधि
संश्लेषण् व विश्लेषण विधि।
स्वाध्याय विधि

अनुशासन 
आत्मानुशासन दंड का विरोध
शिक्षक ज्ञानी संयमी संस्कारी ब्रहमचारी
विदालय 
प्रकृति की गोद में।
भ्रमण पर सर्वाधिक बल
जन शिक्षा स्त्री शिक्षा धार्मिक शिक्षा पर बल दिया
इन्होने शान्तिनिकेतन की स्थापना की
भवन
पाठ भवन प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा
शिक्षा भवन उच्चतर माध्यमिक शिक्षा
विनय भवन शिक्षक प्रशिक्षण्
कला भवन चित्रकला ललित कला
श्री निकेतन ग्रामीण उच्चतर शिक्षा
हिन्दी भवन हिन्दी व तिब्बती भाषा एवं साहित्य।
समाज सेवा मौन प्रार्थना
सर्वधर्म समभाव

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